Posts

सीरत अच्छी होनी चाहिए सूरत नही!

दुनिया मै अच्छे लोग नही मिलते जल्दी से,  कुछ मिले पर दिल के कच्चे थे, दिल तो छोड़ो सीरत के भी कच्चे निकले,  बन्दा सीरत का अच्छा होना चाहिये सूरत का क्या है वो तो गुजरात मै भी है,  जिंदगी लग जाती है सीरत बनाने मै, और मिनट नही लगता बिगड़ने मै,  मानता हूँ सूरत अच्छी होनी चाहिए पर खुदा/भगवान सूरत नही सीरत देखता है,  तभी तो बोला जाता है खुदा/भगवान का नेक बन्दा किसी को,  सिरत बनाओ सूरत तो पैसे के साथ साथ अपने आप ही बन जायेगी! 

कुछ पंक्तियाँ हिंदी के लिए!

चलो आज कुछ हिंदी के लिए लिखते है,  हिंदी मै ही हिंदी को लिखते है,  अब इस भाषा के लिए लिख भी क्या सकते है,  बस ये तो साज़ है अपने दिल का हाल है,  की इस भाषा मै ही पूरा हिंदुस्तान है,  अब विदेशी छोड़ो स्वदेशी अपनाओ,  अपने भाषा को दुबारा उच स्थान पर ले जाओ।  हिंदी दिवस की शुभकामना। 

अच्छा मान लो ना!

 अब सब ठीक है।  मै रहू ना रहू पर तुम खुश रहना।  की हमेशा यादों मै मेरी तुम रहना।  अगर तुमने मुझे छोड़ दिया तो मै टुट जाऊंगा!  अच्छा मान लो ना और तुम हमेशा मेरी ही रहना बस ये भी अब तुम  मान लो ना! 

बलात्कार.....

..........बलात्कार.......... ये क्यों जिस्म की हवस हो रही है, क्यू मासूम लड़कियो की इज़्ज़त को लुटा जा रहा है, ऐ माँ अब आपको धरती पर दुबारा आना होगा अपना दुर्गा का रूप हवस के पुजारियो को दिखाना होगा, नहीं छोड़ना किसी भी दोषी को इनको अच्छा सा अब एक सबक सिखाना होगा, अब माँ आपको धरती पर दुबारा आना होगा और ये जो बलात्कारी है इनको जड़ से खतम करके दिखाना होगा। बंद करो बलात्कार क्यूकि बहन तेरी भी तो होगी रे उसके खातिर की सही रुक जाओ ना! दुनिया बोल रही है सस्त्र उठाओ द्रोपदी नही आयेंगे कृष्ण चलो मान लिया पर तुम ऐसी नोबत आने ही क्यों दे रहे हो की सस्त्र उठाने पड़े किसी द्रोपदी को तुम खुद ही कृष्ण क्यों नही बन जाते!   तुम ना बनो दुर्योधन तो कृष्ण को भी ना आना पड़ेगा और सुरक्षित रहेंगी हमारी द्रोपदी!  😔😫😤

बेटियाँ

बेटियाँ तो घर की लक्ष्मी होती है,  तुम लक्ष्मी चाहते हो पर  बेटियाँ नहीं,  अरे जब बेटियाँ घर मै आयेंगी  तब ही तो घर मै लक्ष्मी आयेगी,  बेटियाँ तो ताज होती है घर का  नाज होती है,  बेटियाँ प्राया धन नही अमूल्य धन होती है,  बेटियाँ तो माँ बाप का गुरुर होती है,  और जब एक औरत अपने गर्भ मै  नो महीने  बच्चे को रख सकती है तो वो  कमज़ोर कैसे हो सकती  है। 

कम ना समझो!

आज कल थोड़ा अकेला सा हू।  अपने अतीत से थोड़ा दूर  हू।  थोड़ा गरीब हू पर दिल का अच्छा हू।  और ज्ञान का भूखा हू।

मर्द (आदमी)!

क्यों हमे बचपन से बोला जाता है की मर्द को दर्द नही होता,  क्यों हमे बचपन से रोने नही दिया जाता,  क्या हमारा दिल नही है,  अगर हम रोये तो क्यों हमे बोला जाता है की देखो कैसे लड़कियो की तरह रो रहा है,  हम लड़के है तो क्या हमे दर्द नही होता ,  इस प्रथा को बदलो तुम और हम मर्दो को भी समझो तुम।