कुछ चार बरस का ही था मै, जब पहली बार स्कूल गया, किसी ने मेरा हाथ थामा लगा की जैसे माँ आ गई, क्या होता है गुरु? उस दिन ही मैने जाना था, पूरे मन, कर्म, वचन से उनको अपना भगवान माना था! गुरु ही तो वह बाती है, जो खुद जलकर प्रकाश फैलाता है, अपनी मेघा के बल पर, छात्रों का भविष्य बनाता है, क्या है हमारी गलती, उनसे हमे अवगत कराता है! सुधार करने का एक मौका देता फिर सव्यं ही उसे बताता है, आत्म विश्वास का एक दीप जलाता मुश्किलों मै साथ निभाता है, तुम सबकुछ कर सकते हो हर बार यही बतलाता है, नमः करता हूँ मै उन सबको, जिन्होंने मुझे इस लायक बनाया है, मै कौन हूँ और क्या हूँ, मेरा मुझसे परिचय करवाया है! By ©:-kavi_herry